चेहरे पर एक कृत्रिम मुस्कान तैयार की जा रही है।

आवाज़ और छवियाँ हमें पालन करने के लिए कह रही हैं।

आप पाऐंगे सच तो ये तसवीर में निहित है।

छोटी सोच शून्य मे प्रेरित है।

कुछ नही है कि एक छवि लुप्त होती है।

तुम बस एक प्रतीक थे, तुम बस एक विषय हो।

भुलाए जा चुके एक सृजन हो।


बवाल की रचना को पलट कर प्रभावक्षेत्र में……

और वह चित्र दयाहीन हो चला।

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