पनी आत्मा एक खुला घाव है

मन मे वो काट रहा है।

किसी वजह से मै स्थानान्तरित नहीं कर सकी


लेकिन सन्तुलन है जब एक सपने की खोज मे हूँ।

ना कोई सुनहरा कुण्डल पहना मैने

भ्रम में महत्वकांक्षा, मुझे पता है ब्रह्माण्ड मेरा है।

पर यह थोड़ा कमज़ोर लगता है

कि मन मे आराम का भाव 

क्यूँ कि जिस रास्ते हमें नीचे किया गया

यही कारण अंतर आत्मा का आवाज़ उठाने का।

मन की सन्तुष्टि है कि सिर्फ 

सपने देख और उम्मीद कि 

जीवन मे अन्नत काल पर जाना।

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